हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , जामेअतुल ज़हरा (स.ल.) की निदेशक सैयदा ज़हरा बरक़ई ने जामेअतुल ज़हेरा (स.ल.) के जिम्मेदार अधिकारियों की 249वीं बैठक में इस हौज़वी शैक्षणिक संस्थान की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें प्रयास करना चाहिए कि अपने ज्ञान को व्यावहारिक क्षेत्र में भी इस्तेमाल करें और इस्लामी व्यवस्था तथा समाज की समस्याओं का समाधान देने में सक्षम बनें।
उन्होंने जामेअतुल ज़हरा (स.ल..) की छात्राओं की शैक्षणिक क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्हम्दुलिल्लाह, हमारी छात्राएं शैक्षणिक आधार पर उत्कृष्ट स्थान रखती हैं और शैक्षणिक तथा सामाजिक समस्याओं का समाधान देने की उल्लेखनीय क्षमता रखती हैं। हालांकि, इनमें से कुछ क्षमताओं का अब तक व्यक्तिगत स्तर पर या शिक्षकों और सक्रिय शैक्षणिक केंद्रों के माध्यम से ही इस्तेमाल किया गया है।
बैठक के दौरान जामेअतुल ज़हेरा (स.ल.) के मानविकी कॉम्प्लेक्स के नए निदेशक हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन असदपुर ने उन पर भरोसा करने और यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए जामेअतुल ज़हरा (स.) की निदेशक का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने मानविकी के क्षेत्र में इस्लामी क्रांति के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति के प्रमुख उद्देश्यों में से एक यह था कि हम आधुनिक मानविकी के क्षेत्र में अपना प्रभाव और भूमिका स्थापित करने में सक्षम हों। हालांकि, हमें केवल इसी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ज्ञान, विचार, मूल्यों और धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर मानवीय एवं सामाजिक घटनाओं पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने इस्लामी मानविकी की अवधारणा के संबंध में शहीद रहबर के दृष्टिकोण की ओर संकेत करते हुए कहा कि शहीद रहबर ने हौज़ा और विश्वविद्यालय के संबंध में आयोजित एक बैठक में ‘मानविकी के इस्लामीकरण’ की इस्लाह के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें कही थीं। उन्होंने इस इस्लाह को पूरी तरह सही अभिव्यक्ति नहीं माना था, क्योंकि इससे यह धारणा पैदा होती है कि आधुनिक मानविकी को पूरी तरह स्वीकार कर लिया गया है और केवल उसके कुछ हिस्सों को इस्लामी अवधारणाओं के माध्यम से पूरा किया जाना है।
हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन असदपुर ने आगे कहा कि इस दृष्टिकोण के आधार पर हमें मौजूदा मानविकी को केवल इस्लामी बनाने के बजाय अपने ज्ञानात्मक और वैचारिक विचारधारा के आधार पर समकालीन इंसान से जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों का सामना करना और उनके बारे में विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें इस स्तर तक सक्षम होना चाहिए कि मानविकी के सिद्धांतों के माध्यम से मानवीय घटनाओं का विश्लेषण और उनकी व्याख्या कर सकें, उनके अस्तित्व में आने के कारणों और कारकों को पहचानें और अंततः नीति-निर्माण, प्रबंधन तथा इन घटनाक्रमों की दिशा निर्धारित करने के चरण तक पहुंचें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अधिक वांछनीय स्थिति किस प्रकार पैदा की जा सकती है।
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